छपरा। सारण डाक प्रमंडल में सरकारी बचत योजनाओं के निर्धारित लक्ष्य पूरे दिखाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम पर बड़ी संख्या में RD और TD खाते खोलने के आरोप सामने आए हैं। विभाग से जुड़े सूत्रों का दावा है कि मार्च क्लोजिंग के दौरान कुछ स्थानों पर एक ही व्यक्ति के नाम पर बड़ी संख्या में खाते खोले गए।

मामले में खातों की संख्या, उन्हें खोलने की प्रक्रिया, जमा राशि के स्रोत और इससे जुड़े संभावित प्रोत्साहन भुगतान को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र विभागीय जांच या आधिकारिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

एक ही नाम पर 100 खाते खोलने का दावा

डाक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर दावा किया कि मार्च क्लोजिंग के दौरान छपरा प्रधान डाकघर में पदस्थापित वरिष्ठ पोस्टमास्टर उषा कुमारी के नाम पर एक ही दिन में 1,000 रुपये राशि वाले करीब 100 TD खाते खोले गए।

सूत्रों ने यह भी दावा किया कि मढ़ौरा अनुमंडल से जुड़े सहायक डाक अधीक्षक संतोष कुमार के नाम पर भी कई खाते खोले गए।

वहीं मढ़ौरा हेड ऑफिस के पोस्टमास्टर सच्चिदानंद शर्मा के नाम पर जनवरी से मार्च के बीच बड़ी संख्या में RD और TD खाते खोले जाने का दावा किया गया है। सूत्रों के अनुसार इनकी संख्या लगभग 300 तक हो सकती है।

इन दावों की आधिकारिक पुष्टि के लिए संबंधित खातों के CBS रिकॉर्ड, KYC दस्तावेज और ट्रांजेक्शन लॉग की जांच आवश्यक होगी।

इंसेंटिव को लेकर भी सवाल

सूत्रों का दावा है कि खाते खोलने से जुड़े विभागीय प्रोत्साहन भुगतान ने भी इस मामले को गंभीर बना दिया है।

आरोप है कि यदि एक ही व्यक्ति या सीमित संख्या में व्यक्तियों के नाम पर बड़ी संख्या में खाते खोले गए, तो यह जांच का विषय है कि इन खातों के आधार पर कोई इंसेंटिव या अन्य वित्तीय लाभ जारी हुआ या नहीं।

इसकी पुष्टि के लिए संबंधित अवधि के CBS रिकॉर्ड, भुगतान विवरण, कमीशन या इंसेंटिव वाउचर तथा लाभार्थी खातों की जांच जरूरी होगी।

कर्मचारियों पर टारगेट का दबाव होने का आरोप

कुछ ग्रामीण डाक सेवकों और उप डाकपालों ने दावा किया कि लक्ष्य पूरा करने के लिए उन पर काफी दबाव बनाया जाता था।

उनका आरोप है कि वर्चुअल बैठकों में लक्ष्य पूरा न होने पर प्रतिकूल कार्रवाई, वेतन रोकने या तबादले जैसी चेतावनियां दी जाती थीं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि इसी दबाव में उन्हें अपने या परिवार के सदस्यों के नाम पर भी खाते खोलने पड़े।

इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष लिया जाना बाकी है।

अमनौर, अपहर और बनियापुर में भुगतान को लेकर शिकायतें

अमनौर, अपहर और बनियापुर क्षेत्र में कुछ खाताधारकों द्वारा मैच्योरिटी भुगतान में देरी की शिकायतें भी सामने आई हैं।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें भुगतान के लिए कई बार डाकघर जाना पड़ा। कुछ मामलों में KYC, तकनीकी समस्या या नकदी उपलब्धता का कारण बताया गया।

हालांकि भुगतान में देरी और कथित रूप से बल्क में खोले गए खातों के बीच सीधा संबंध है या नहीं, इसकी आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जांच में इन सवालों का जवाब जरूरी
क्या एक ही PAN और Aadhaar पर इतनी बड़ी संख्या में खाते खोलने की अनुमति नियमों के तहत थी?
संबंधित खातों में जमा राशि का स्रोत क्या था?
क्या इन खातों के आधार पर कोई इंसेंटिव या कमीशन दिया गया? यदि हां, तो किसे?
क्या CBS सिस्टम में ऐसे असामान्य पैटर्न के लिए कोई अलर्ट या निगरानी व्यवस्था मौजूद थी?
मैच्योरिटी भुगतान में देरी की वास्तविक वजह क्या है?
क्या संबंधित खातों और KYC रिकॉर्ड का विभागीय ऑडिट कराया जाएगा?
पोस्ट मास्टर जनरल ने कहा: मेरे संज्ञान में मामला नहीं

उत्तरी क्षेत्र, मुजफ्फरपुर के पोस्ट मास्टर जनरल पवन कुमार सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि इस तरह का मामला सामने आया है तो यह गलत है और इसकी जानकारी उन्हें अभी तक नहीं मिली है।

Deshline ने इस मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारियों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया है। प्रतिक्रिया मिलने पर उसे रिपोर्ट में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।